सिलिकॉन (Si)
| परमाणु क्रमांक | 14 |
|---|---|
| परमाणु द्रव्यमान | 28.085 u |
| वर्ग | उपधातु |
| इलेक्ट्रॉन विन्यास | [Ne] 3s² 3p² |
| रूप | क्रिस्टलीय, परावर्तक, नीली आभा वाले फलकों के साथ |
| घनत्व (STP) | 2330 g/L |
| गलनांक | 1687 K |
| क्वथनांक | 3538 K |
| विद्युत ऋणात्मकता | 1.9 (पॉलिंग) |
| आयनन ऊर्जा | 786.5 kJ/mol |
| परमाणु त्रिज्या | 110 pm |
| क्रिस्टल संरचना | चतुष्फलकीय संकुलन |
| खोजकर्ता | जॉन्स जैकब बर्ज़ेलियस (1824) |
संक्षिप्त परिचय
सिलिकॉन (Si) एक कठोर, भंगुर, क्रिस्टलीय उपधातु है जिसकी चमक नीली-धूसर धात्विक होती है। यह पृथ्वी की पर्पटी में दूसरा सबसे प्रचुर तत्व है और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिकी तथा कंप्यूटर प्रौद्योगिकी की नींव है। सिलिकॉन (Si) के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
उपयोग: अर्धचालक उद्योग (कंप्यूटर चिप, सौर सेल, ट्रांज़िस्टर) पर इसका प्रभुत्व है; सिलिकोन बहुलकों (स्नेहक, सीलेंट, चिकित्सा प्रत्यारोपण), काँच और सिरेमिक उत्पादन तथा एल्युमिनियम और इस्पात मिश्रधातुओं में प्रयुक्त। उच्च-शुद्धता सिलिकॉन फ़ोटोवोल्टिक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उत्पादन/निष्कर्षण: विद्युत आर्क भट्टियों में क्वार्ट्ज़ (SiO₂) को कार्बन से अपचयित करके धातुकर्म-श्रेणी सिलिकॉन बनाया जाता है। अत्यधिक शुद्धता (99.9999999%+) चाहने वाले अर्धचालक और सौर अनुप्रयोगों के लिए इसे रासायनिक शुद्धिकरण (सीमेंस प्रक्रम) या ज़ोन शोधन द्वारा और परिष्कृत किया जाता है।
इतिहास: 1824 में योंस याकोब बर्ज़ेलियस ने इसे तत्व के रूप में पहचाना, हालाँकि 1800 में हम्फ्री डेवी ने इसे पहली बार पृथक किया था। इसका नाम लैटिन "silex" (चकमक पत्थर) से लिया गया है। ट्रांज़िस्टर क्रांति (1947) और एकीकृत परिपथ के आविष्कार (1958) ने सिलिकॉन को डिजिटल युग की नींव बना दिया।
स्वास्थ्य प्रभाव और सुरक्षा: सिलिकॉन की धूल (विशेषकर क्रिस्टलीय सिलिका) से सिलिकोसिस होता है, जो व्यावसायिक संपर्क से होने वाला फेफड़ों का गंभीर रोग है। तात्विक सिलिकॉन विषैला नहीं है। सिलिकॉन कुछ जीवों (डायटम, स्पंज) के लिए आवश्यक है और संभवतः मानव अस्थि स्वास्थ्य में भूमिका निभाता है।
मूल्य/बाज़ार: धातुकर्म-श्रेणी सिलिकॉन अपेक्षाकृत सस्ता है; अर्धचालक और सौर-श्रेणी सिलिकॉन ऊँची कीमत पाता है। बाज़ार इलेक्ट्रॉनिकी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों से संचालित है।
गुणधर्म: अर्धचालक गुण (चालकता धातुओं और विद्युतरोधियों के बीच), चार संयोजी इलेक्ट्रॉन बहुमुखी बंधन संभव बनाते हैं, कमरे के तापमान पर भंगुर, मज़बूत सहसंयोजक बंध बनाता है, और अक्रिस्टलीय तथा क्रिस्टलीय दोनों रूपों में पाया जाता है।
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