आइंस्टाइनियम (Es)
| परमाणु क्रमांक | 99 |
|---|---|
| परमाणु द्रव्यमान | 252 u |
| वर्ग | ऐक्टिनाइड |
| इलेक्ट्रॉन विन्यास | [Rn] 5f¹¹ 7s² |
| रूप | चाँदी के रंग का |
| गलनांक | 1133 K |
| क्वथनांक | 1269 K |
| विद्युत ऋणात्मकता | 1.3 (पॉलिंग) |
| आयनन ऊर्जा | 619 kJ/mol |
| क्रिस्टल संरचना | फलक-केंद्रित घनीय (अनुमानित) |
| खोजकर्ता | लॉरेंस बर्कली राष्ट्रीय प्रयोगशाला (1952) |
संक्षिप्त परिचय
आइंस्टाइनियम (Es) एक चाँदी जैसी, रेडियोधर्मी ऐक्टिनाइड धातु है। यह अत्यंत दुर्लभ है और इसका अध्ययन कठिन है। आइंस्टाइनियम (Es) के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
उपयोग: कोई व्यावहारिक अनुप्रयोग नहीं। केवल भारी तत्वों के गुणों के अध्ययन और उनसे भारी तत्व बनाने हेतु वैज्ञानिक शोध में प्रयुक्त।
उत्पादन/निष्कर्षण: नाभिकीय रिएक्टरों में प्लूटोनियम या कैलिफ़ोर्नियम पर न्यूट्रॉनों की बमबारी करके बनाया जाता है। केवल माइक्रोग्राम मात्रा में उत्पादित। पृथक करना अत्यंत कठिन है।
इतिहास: 1952 में पहले हाइड्रोजन बम परीक्षण (आइवी माइक) के मलबे में अल्बर्ट घियोर्सो और सहयोगियों ने इसकी खोज की। इसका नाम अल्बर्ट आइंस्टाइन के नाम पर रखा गया।
स्वास्थ्य प्रभाव और सुरक्षा: अत्यधिक रेडियोधर्मी। अत्यधिक दुर्लभता के कारण विशिष्ट विषाक्तता के आँकड़े सीमित हैं, पर इसे अत्यधिक ख़तरनाक माना जाता है। कड़ा परिरोधन आवश्यक है।
मूल्य/बाज़ार: व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं। केवल विशेष सुविधाओं में शोध के लिए बनाया जाता है।
गुणधर्म: रेडियोधर्मी, चाँदी जैसा धात्विक रूप (अनुमानित), सबसे आम समस्थानिक Es-253 का अर्ध-आयु काल 20.5 दिन है, गलनांक लगभग 860°C।