ऐस्टटीन (At)

परमाणु क्रमांक85
परमाणु द्रव्यमान210 u
वर्गसंक्रमणोत्तर धातु
इलेक्ट्रॉन विन्यास[Xe] 4f¹⁴ 5d¹⁰ 6s² 6p⁵
रूपअज्ञात, संभवतः धात्विक
घनत्व (STP)7000 g/L
गलनांक575 K
क्वथनांक610 K
विद्युत ऋणात्मकता2.2 (पॉलिंग)
आयनन ऊर्जा899.003 kJ/mol
परमाणु त्रिज्या127 pm
क्रिस्टल संरचनाफलक-केंद्रित घनीय (अनुमानित)
खोजकर्ताडेल आर. कॉर्सन (1940)

संक्षिप्त परिचय

ऐस्टैटीन (At) एक रेडियोधर्मी हैलोजन है और पृथ्वी की पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला सबसे दुर्लभ तत्व है। इसका कोई स्थायी समस्थानिक नहीं है। ऐस्टैटीन (At) के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

उपयोग: मुख्यतः कैंसर के उपचार के लिए लक्षित अल्फ़ा-कण चिकित्सा हेतु नाभिकीय चिकित्सा शोध (ऐस्टैटीन-211) में प्रयुक्त। दुर्लभता और छोटे अर्ध-आयु काल के कारण कोई अन्य व्यावसायिक अनुप्रयोग नहीं।

उत्पादन/निष्कर्षण: यूरेनियम और थोरियम के क्षय उत्पाद के रूप में प्राकृतिक रूप से अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में पाया जाता है। बिस्मथ पर अल्फ़ा कणों की बमबारी करके कृत्रिम रूप से बनाया जाता है।

इतिहास: 1940 में UC बर्कले में डेल आर. कॉर्सन, केनेथ रॉस मैकेंज़ी और एमिलियो सेग्रे ने इसे संश्लेषित किया। इसका नाम यूनानी "astatos" (अस्थिर) से रखा गया। प्राकृतिक ऐस्टैटीन की खोज बाद में हुई।

स्वास्थ्य प्रभाव और सुरक्षा: अत्यधिक रेडियोधर्मी और ख़तरनाक। आयोडीन की तरह थायरॉइड ग्रंथि में जमा होता है। केवल विशेष प्रयोगशालाओं में अनुरेखक मात्रा में संभाला जाता है।

मूल्य/बाज़ार: व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं। शोध और चिकित्सा परीक्षणों के लिए कण त्वरकों में माँग पर बनाया जाता है।

गुणधर्म: अत्यधिक रेडियोधर्मी, छोटा अर्ध-आयु काल (सबसे लंबा 8.1 घंटे), संभवतः धात्विक गुणों वाला काला ठोस, हैलोजन जैसा रासायनिक व्यवहार दर्शाता है पर आयोडीन की तुलना में अधिक धात्विक प्रकृति रखता है।

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