सोना (Au)

परमाणु क्रमांक79
परमाणु द्रव्यमान196.9665695 u
वर्गसंक्रमण धातु
इलेक्ट्रॉन विन्यास[Xe] 4f¹⁴ 5d¹⁰ 6s¹
रूपधात्विक पीला
घनत्व (STP)19300 g/L
गलनांक1337.33 K
क्वथनांक3243 K
विद्युत ऋणात्मकता2.54 (पॉलिंग)
आयनन ऊर्जा890.1 kJ/mol
परमाणु त्रिज्या135 pm
क्रिस्टल संरचनाफलक-केंद्रित घनीय
खोजकर्ताप्राचीन सभ्यताएँ (-2500)

संक्षिप्त परिचय

सोना (Au) एक चमकीली, हल्की लालिमा-युक्त पीली, सघन, मुलायम, आघातवर्धनीय और तन्य धातु है। यह सबसे कम अभिक्रियाशील रासायनिक तत्वों में से एक है और मानक परिस्थितियों में ठोस है। सोना (Au) के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

उपयोग: आभूषणों (खपत का लगभग 50%), निवेश (सिल्लियाँ, सिक्के), इलेक्ट्रॉनिकी (संक्षारण-मुक्त कनेक्टर), दंत चिकित्सा और एयरोस्पेस (विकिरण परिरक्षण) में प्रयुक्त। नैनोकणीय सोने का उपयोग चिकित्सा और शोध में होता है।

उत्पादन/निष्कर्षण: सोने के अयस्कों (प्राकृत सोना, इलेक्ट्रम) से सायनाइडीकरण या अन्य निक्षालन प्रक्रियाओं द्वारा निकाला जाता है। चीन, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अमेरिका प्रमुख उत्पादक हैं। आपूर्ति का एक बड़ा भाग पुनर्चक्रण से आता है।

इतिहास: प्रागैतिहासिक काल से ज्ञात और अत्यधिक मूल्यवान। मानव इतिहास, मुद्रा और संस्कृति में केंद्रीय भूमिका निभाई। प्रतीक Au लैटिन "aurum" (चमकती भोर) से आया है।

स्वास्थ्य प्रभाव और सुरक्षा: धात्विक रूप में विषहीन और जैविक रूप से निष्क्रिय (खाने योग्य सोने का वर्क)। घुलनशील स्वर्ण यौगिक यकृत और गुर्दों के लिए विषैले हो सकते हैं। ऐतिहासिक रूप से रूमेटॉइड आर्थराइटिस के लिए चिकित्सा (क्राइसोथेरेपी) में प्रयुक्त।

मूल्य/बाज़ार: मूल्य संचय का प्रमुख वैश्विक साधन और मुद्रास्फीति से बचाव। कीमत लंदन बाज़ारों द्वारा प्रतिदिन तय की जाती है। केंद्रीय बैंकों के पास बड़े भंडार हैं। माँग सांस्कृतिक, औद्योगिक और वित्तीय है।

गुणधर्म: सभी धातुओं में सबसे अधिक आघातवर्धनीय और तन्य (1 ग्राम को पीटकर 1 वर्ग मीटर तक फैलाया जा सकता है), उत्कृष्ट विद्युत और ऊष्मा चालक, अवरक्त का अत्यधिक परावर्तक, धूमिल या संक्षारित नहीं होता, और +1 तथा +3 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ दर्शाता है।

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