लॉरेन्सियम (Lr)
| परमाणु क्रमांक | 103 |
|---|---|
| परमाणु द्रव्यमान | 266 u |
| वर्ग | ऐक्टिनाइड |
| इलेक्ट्रॉन विन्यास | [Rn] 5f¹⁴ 7s² 7p¹ |
| गलनांक | 1900 K |
| विद्युत ऋणात्मकता | 1.3 (पॉलिंग) |
| आयनन ऊर्जा | 470 kJ/mol |
| क्रिस्टल संरचना | षट्कोणीय (अनुमानित) |
| खोजकर्ता | लॉरेंस बर्कली राष्ट्रीय प्रयोगशाला (1961) |
संक्षिप्त परिचय
लॉरेंसियम (Lr) एक रेडियोधर्मी ऐक्टिनाइड धातु है और ऐक्टिनाइड श्रेणी का अंतिम सदस्य है। लॉरेंसियम (Lr) के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:
उपयोग: कोई व्यावहारिक अनुप्रयोग नहीं। केवल भारी तत्वों के गुणों के अध्ययन और सैद्धांतिक भविष्यवाणियों के परीक्षण हेतु वैज्ञानिक शोध में प्रयुक्त।
उत्पादन/निष्कर्षण: कण त्वरकों में कैलिफ़ोर्नियम पर बोरॉन आयनों की बमबारी करके बनाया जाता है। एक बार में केवल कुछ परमाणु बनते हैं।
इतिहास: 1961 में UC बर्कले में अल्बर्ट घियोर्सो, टोरब्योर्न सिक्केलैंड, अल्मन लार्श और रॉबर्ट लैटिमर ने इसकी खोज की। इसका नाम साइक्लोट्रॉन के आविष्कारक अर्नेस्ट लॉरेंस के नाम पर रखा गया।
स्वास्थ्य प्रभाव और सुरक्षा: अत्यधिक रेडियोधर्मी। अत्यधिक दुर्लभता के कारण स्वास्थ्य संबंधी कोई आँकड़े नहीं हैं, पर इसे अत्यंत ख़तरनाक माना जाता है।
मूल्य/बाज़ार: व्यावसायिक रूप से उपलब्ध नहीं। केवल शोध के लिए बनाया जाता है।
गुणधर्म: रेडियोधर्मी, सबसे स्थायी समस्थानिक Lr-266 का अर्ध-आयु काल 11 घंटे है, गलनांक लगभग 1627°C (अनुमानित), और इसके गुण ऐक्टिनाइडों तथा संक्रमण धातुओं के बीच संक्रमणकालीन होने का अनुमान है।