रीनियम (Re)

परमाणु क्रमांक75
परमाणु द्रव्यमान186.2071 u
वर्गसंक्रमण धातु
इलेक्ट्रॉन विन्यास[Xe] 4f¹⁴ 5d⁵ 6s²
रूपचाँदी जैसा धूसर
घनत्व (STP)21020 g/L
गलनांक3459 K
क्वथनांक5869 K
विद्युत ऋणात्मकता1.9 (पॉलिंग)
आयनन ऊर्जा760 kJ/mol
परमाणु त्रिज्या135 pm
क्रिस्टल संरचनासरल षट्कोणीय
खोजकर्तामासाताका ओगावा (1925)

संक्षिप्त परिचय

रीनियम (Re) एक दुर्लभ, चाँदी-सी सफ़ेद, चमकदार, अत्यंत सघन संक्रमण धातु है और पृथ्वी की पर्पटी के सबसे दुर्लभ तत्वों में से एक है। इसका गलनांक सभी तत्वों में तीसरा सबसे ऊँचा है और यह संक्षारण के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। रीनियम (Re) के बारे में मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

उपयोग: मुख्यतः जेट इंजन टरबाइन ब्लेडों की उच्च-ताप सुपरमिश्रधातुओं (उच्च गलनांक और विसर्पण प्रतिरोध के कारण), विद्युत संपर्कों, उच्च तापमान मापने वाले थर्मोकपलों और पेट्रोलियम शोधन के उत्प्रेरकों में प्रयुक्त।

उत्पादन/निष्कर्षण: यह अत्यंत दुर्लभ है, पर्पटी में इसकी औसत प्रचुरता केवल लगभग 1 भाग प्रति अरब है। यह मुख्यतः ताँबा और मॉलिब्डेनम खनन के उपोत्पाद के रूप में प्राप्त होता है, क्योंकि यह मॉलिब्डेनाइट अयस्क में अल्प मात्रा में पाया जाता है।

इतिहास: 1925 में जर्मनी में वाल्टर नोडैक, इडा टाके और ओटो बर्ग ने इसकी खोज की। यह स्थायी समस्थानिक वाला अंतिम खोजा गया तत्व था और इसका नाम जर्मनी की राइन नदी (लैटिन: Rhenus) के नाम पर रखा गया।

स्वास्थ्य प्रभाव और सुरक्षा: रीनियम धातु अपेक्षाकृत विषहीन है, पर इसके कुछ यौगिक, विशेषकर पररीनेट, विषैले और उत्तेजक हो सकते हैं। शरीर में इसके संचित होने की जानकारी नहीं है।

मूल्य/बाज़ार: सबसे दुर्लभ और सबसे महँगी धातुओं में से एक, जिसकी कीमतें एयरोस्पेस और पेट्रोलियम उद्योगों की माँग से संचालित होती हैं। आपूर्ति सीमित है और ताँबा तथा मॉलिब्डेनम उत्पादन पर निर्भर है।

गुणधर्म: इसका गलनांक सभी तत्वों में तीसरा सबसे ऊँचा (3186°C) है, यह अत्यंत सघन (21.02 g/cm³) है और संक्षारण तथा ऑक्सीकरण के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। भार के अनुसार यह सबसे महँगी धातुओं में से भी एक है।

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